“नजरेँ मिलाना, नजरेँ चुराना”
July 17, 2008
फिल्म “जाने तु या जाने ना” को यो गीत मलाई खूब मन पर्यो। तल पढ्नुहोस् त तपाईँलाइ पनि यस्का शब्द मन पर्छन्। फिल्मका निर्देशकले नै कथा त गीतहरू लेखेका रहेछन्- मलाई त यति मिठा शब्द लेख्ने मान्छे कस्ता रहेछन् भनेर थाह पाउन मन लाग्यो।
दिल कभि गन्धा, कभि है नेक बन्दा
दिल का भरोसा, केसे कोही करे
दिल कभि ठँडा, कभि है atom-बम सा
ये धमाका से कोही सहे
दिल की यही खता है
दिल को नहिँ पता है
दिल की यही खता है
दिल को नहिँ पता है
के दिल चाहता है क्या
नजरेँ मिलाना, नजरेँ चुराना
कहीँ पे निगाहेँ, कहीँ पे निशाना
नजरेँ मिलाना, नजरेँ चुराना
कहीँ पे निगाहेँ, कहीँ पे निशाना
नियत तो दिल की हमेशा ही सही थी
दिल का इरादा भी सम्झो नेक था
फित्रत आवारा तो क्या करे बिचारा
उसको हो जाए दिल जिस्को देखता
दिन मेँ तो दिल सताए
रातोँ मेँ दिल जगाए
दिन मेँ तो दिल सताए
रातोँ मेँ दिल जगाए
अरे चाहता है क्या
नजरेँ मिलाना, नजरेँ चुराना
कहीँ पे निगाहेँ, कहीँ पे निशाना
नजरेँ मिलाना, नजरेँ चुराना
कहीँ पे निगाहेँ, कहीँ पे निशाना
आँखो मेँ कोही है बसा
जाने क्यौँ लगे ये दिल खाली
जाने ना क्यौँ ये दिल बजा रहा
एक हात से ताली
होटोँ से जाने क्या कहा
फिर भी दिल की बात है दिल मेँ
येह रहा तेरा हमसफर
कीस्को ढूँडे दिल की मेहेफिल मेँ
जान है फसिँ, केसे ना हसिँ
आए हाले दिल पे!
नजरेँ मिलाना, नजरेँ चुराना
कहीँ पे निगाहेँ, कहीँ पे निशाना
नजरेँ मिलाना, नजरेँ चुराना
कहीँ पे निगाहेँ, कहीँ पे निशाना